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मन को खाली करना सीखो | learn to clear your mind| Apne Mind Ko Shant Kaise Kare।

एक गुरु का एक शिष्य बहुत ही गहन ध्यान कर रहा था लेकिन उसका ध्यान नहीं लग रहा था उसका मन हमेशा विचारों से भरा रहता उसने अपने मन को खाली करने की बहुत कोशिश की पर उसकी सारी कोशिश नाकाम रही अंत में जब वह सारी कोशिश कर चुका तब वह अपने गुरु के पास गया और उसने अपनी गुरु से कहा गुरुदेव मेरा मन हमेशा विचारों से भरा रहता है मेरा ध्यान एक जगह पर नहीं लग पा रहा मैं चेक करता हूं तो दूसरी चीज पर पहुंच जाता हूं फिर तीसरी और चौथी ऐसे करते-करते मेरे मन में हजारों विचार चलते चले जाते हैं और यह कब होता है मुझे पता भी नहीं चलता बहुत देर बाद मुझे एहसास होता है कि मैं क्या करने बैठा था और क्या सोच रहा हूं हे गुरुदेव मैं अपने मन को विचारों से खाली कर देना चाहता हूं मैं चाहता हूं कि मेरे मन में एक भी विचार ना हो जब मैं चाहूं तभी विचार उत्पन्न हो गुरु ने कहा किसी भी समस्या का समाधान कब निकलता है जब हम समस्या की जड़ तक पहुंचते हैं समस्या को ठीक से समझते हैं और उसको जानते हैं जिस मन को तुम खाली करना चाहते हो क्या तुमने उस मन को थोड़ा बहुत भी जाना है शिष्य ने कहा गुरुदेव मन को जानने की बहुत कोशिश की मैंने लेकिन मैं जितना जानता हूं इसके बारे में वह उतना ही रहस्यमई होता जाता है गुरु ने कहा जाओ और एक घड़े को छोटे छोटे पत्थरों से भर कर लेकर आओ फिर से एक घडे में छोटे छोटे पत्थर भरकर ले आया और गुरु के पास रख दिए गुरु ने कहा इस घड़े को तुम अपना मन समझा और इस घड़े में भरे पत्थरों को अपनी विचार अब इस घड़े में और पत्थर डालो शिष्य घड़े में पत्थर डालना शुरू किया घड़ा पहले से ही भरा हुआ था 12 पत्थर डालने के बाद बाकी सारे पत्थर नीचे गिरने लगे तब गुरु ने कहा रुको ध्यान से देखो अब घड़े में पत्थर नहीं आ रही बल्कि वह नीचे गिर रही है क्योंकि यह भरा है जो इसमें आ सकता था आ गया अब और पत्थर नहीं आएंगे अगर दूसरे पत्थर डालनी है तो पहले वाले पत्थरों को निकालना होगा शिष्य ने तुरंत ही कहा गुरुदेव मैं समझ गया हूं कि आप क्या बताना चाहते हैं आप बताना चाहते हैं कि हमें अपने मन को विचारों से खाली कर देना चाहिए गुरु मुस्कराए और गुरु ने कहा पहले पूरी बात समझ लो उसके बाद मन को खाली कर लेना गुरु ने कहा हमारा मन इस घड़े की बिल्कुल उल्टा हैं, घड़े को तुम पत्थर से भर सकते हो लेकिन मन को विचारों से नहीं भर पाओगे मन हमेशा खाली ही रहता है शिष्य ने कहा गुरुदेव मैं कुछ समझ नहीं पा रहा हूं मन अगर हमेशा खाली रहता है तो हम उसे खाली करने में क्यों लगे रहते हैं उसकी क्या आवश्यकता है गुरु ने कहा इस घड़े से सारे पत्थरों को एक-एक करके बाहर निकाल दो शिष्य ने ऐसा ही किया घड़े से एक पत्थर बाहर निकाल कर रखता रहा और अंत में वह घड़ा खाली हो गया गुरु ने कहा देखा तुमने एक एक पत्थर को बाहर निकाला तो यह घड़ा खाली हो गया अब तुम इस घड़े में कोई भी पत्थर डाल सकते हो दूसरी पत्थर डाल सकते हो या उन्हीं पत्थरों को दोबारा भी डाल सकती हो आधा भर सकते हो या इसे फिर से पूरा भर सकते हो शिष्य ने कहा गुरुदेव मैं भी तो यही कह रहा हूं कि मन को खाली करना है यह पत्थर है इन्हें आसानी से निकाला जा सकता है और घड़े को खाली किया जा सकता है लेकिन मैं अपने मन को कैसे खाली करूं गुरु ने कहा इस खाली घड़े में एक पत्थर डालो और दो पत्थर निकालो जिससे ने कहा ऐसा कैसे हो सकता जब इस घड़े एक पत्थर होगा तो एक ही पत्थर निकलेगा तो कैसे निकल सकते हैं गुरु ने कहा चलो तो ऐसा करो इस घड़े में दो पत्थर डालो और चार पत्थर निकालो शिष्य ने कहा गुरुदेव ऐसा कैसे हो सकता है यह कोई चमत्कारी घड़ा तो है नहीं कि एक डालो तो दो निकालो दो डालो तो चार गुरु ने कहा यह घड़ा चमत्कारी नहीं है लेकिन जो तुम्हारा घड़ा है यानी जो तुम्हारा मन है वह चमत्कारी है उसमें सिर्फ तुम एक विचार निकाल लोगे तो उसके पीछे दो विचार निकलते हैं जब तुम उन दो विचारों को पकड़ते हो तो उसके पीछे चार विचार निकलते हैं और जब तुम उन चार विचारों को पकड़ते हो तो उसके पीछे 16 विचार निकलते हैं और ऐसे ही करते करते विचारों की एक लंबी श्रंखला बनती चली जाती है और तुम कहीं नहीं रुकते एक के बाद एक विचारों को पकड़ते जाते हो यह मिट्टी का घड़ा तो पत्थरों से भरी जाएगा लेकिन तुम्हारा मन कभी नहीं भरता वह हमेशा खाली है और खाली नहीं रहता यह मन की माया है कि सब कुछ है लेकिन कुछ भी नहीं खींचे ने कहा गुरुदेव मैं आप की बात समझ रहा हूं लेकिन क्या मैं हमेशा अपने विचारों की जाल में ही फंसा रहूंगा क्या मन की माया से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है गुरु ने कहा इस मिटटी के घड़े को आधा पत्थरों से भर दो शिष्य ने ऐसा ही किया फिर गुरु ने कहा अब इन पत्थरों में से कोई एक पत्थर चुनो और उस पत्थर की एक छोटी सी मूर्ति बनाकर मुझे दो मैं जानता हूं तुम्हें अच्छे कलाकार हो सीजन 11 पत्थर निकाला और उस पत्थर को तराशने लगा फिर उसे लगा कि यह पत्थर अच्छा नहीं है तो उसने दूसरा पत्थर घड़े से निकाला उसे उस पत्थर में भी मजा नहीं आया फिर उसमें तीसरा पत्थर निकाला उसका रंग उसे अच्छा नहीं लग रहा था फिर उसने चौथा पत्थर निकाला लेकिन इस पत्थर में भी उसे दोष नजर आया इस तरह करके उसने लगभग सारे पत्थर बाहर निकाल दिए उसे ऐसा करता देख गुरु ने कहा जिस पत्थर को तुम ने पहली बार निकाला था उसी पत्थर को यह समझ कर तारा सो कि कोई और पत्थर तुम्हारे पास है ही नहीं तब उस शिष्य ने उस पत्थर को ही तलाशना शुरू किया और उस पत्थर से उसने अपने गुरु की एक अति सुंदर मूर्ति बनाई और अपने गुरु को भी की और कहा इस पत्थर से इतनी सुंदर मूर्ति बन सकती है मैं यह सोच भी नहीं सकता था गुरु ने कहा जब हमारे पास विकल्प नहीं होता तब हमारे पास जो भी होता है हम उसी में अपनी संपूर्ण ऊर्जा लगाते हैं और उसी को सबसे बेहतर बनाते हैं और जब विकल्प होता है तब हम बस पत्थर ही चुनते रह जाते हैं मूर्ति बनती ही नहीं है हमारा मन भी हमारे लिए एक विचार के पीछे हजारों विकल्प खोल कर रख देता है और हम एक मुख्य विचार को छोड़कर उन हजारों विकल्पों में फंस जाते हैं शिष्य ने कहा मैं आपकी बात अच्छी तरह से समझ गया हूं लेकिन अब मुझे क्या करना चाहिए मेरा मार्गदर्शन करें गुरु ने कहा मन की जाल में मत ंसो मन को खाली करने का प्रयास मत करो अपने ध्यान को एकत्रित करो एकाग्रता लाओ जो कर रहे हो उसे अंतिम समझकर करो ऐसे करो कि इसके बाद तुम्हें कुछ नहीं करना और जब दूसरे विचार पर कार्य करो तब केवल उसी पर कार्य करो किसी तीसरे विचार पर नहीं मन के माया जाल से निकलना इतना आसान नहीं लेकिन अभ्यास करने से सब कुछ पाया जा सकता है टीचर ने कहा गुरुदेव मैं ऐसा ही करूंगा यह बात समझाने के लिए आपका बहुत धन्यवाद हम सब अपने मन को खाली करने का प्रयास करते रहते हैं हमारे मन में जो विचार उठते रहते हैं उससे हम परेशान रहते हैं हम चाहते हैं यह विचार कहीं चले जाए और हम शांत हो जाए लेकिन हम जितना इन विचारों से भागते हैं यह विचार हमें उतनी ही जोर से पकड़ ले क्योंकि हम विचारों को शांत करने के लिए विचारों का ही प्रयोग करते हैं और जिन विचारों का प्रयोग करते हैं वह विचार आपके उन्हीं विचारों से जुड़े होते हैं जिन विचारो ं को आप छोड़ना चाहते हो यह सूचना नहीं चाहते तो यह कैसे संभव होगा कि आप शांत हो सके यह तभी संभव हो सकता है जब आप शांत होने की कोशिश भी छोड़ दें और अपनी समस्या के समाधान पर ध्यान दें एकाग्रता लाए ध्यान लगाएं और इस बात को समझें कि चिंता करने से समाधान नहीं मिलते चिंतन करने से समाधान मिलते हैं

By MUKESH KUMAR SRIVASTAVA

I AM MUKESH KUMAR SRIVASTAVA

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