Category: Moral of the Story

  • आज कल आप ठीक से बात नहीं कर रहे है।(कहानी)

    सुजीत 8 बजे सुबह घर से ऑफिस के लिए निकला, उनकी श्रीमती मधु ने आवाज लगाई : – प्याज के साथ हरा मिर्च भी डाल दिया है टिफिन में, दो रोटी और राजमा भी।आज कल खाया नहीं जा रहा था सुजीत से दो रोटी भी। पिछले कुछ दिनो से सुजीत गुमसुम बैठा रहता था, आवाज…

  • जब हर जगह से नकार दिया जाता हूँ !”(कहानी)

    “माँ बाप के साथ से बन जाये बात “”क्या हुआ आज भी नौकरी नही मिली ना ?” सविता बेटे नमन के घर मे घुसते ही बोली।” हाँ नही मिली तो क्या करूँ कोशिश कर रहा हूँ ना !” नमन झुंझला कर बोला।” माँ पर क्यो झुंझला रहा है ? जब कहा था मन लगा के…

  • गंवार (कहानी)

    गंवार (कहानी)

    “इतनी बड़ी तो कोई बात नहीं हुई पापा, जो आप मुझे गांव भेज दो… है ही क्या वहां! मिट्टी, गंदगी और गंवार लोग.””राघवऽऽ… अब अगर तुमने ज़ुबान से एक भी शब्द गांव और वहां रहनेवालों के लिए निकाला, तो अच्छा नहीं होगा.” अब तक शांति से बात करते नवीन ने ग़ुस्से से तिलमिलाते हुए कहा.।…

  • टांग अड़ाने वाले बात (कहानी)

    श्रुति कालेज से लौटी तो पता चला लड़के वाले आ चुके थे। मम्मी -पापा उनकी खातिरदारी का काम अकेले ही संभाल रहे थे। भाभी कमरे में बंद थी… जानबूझकर.. हां उनका व्यवहार कुछ ऐसा ही था, परिवार में कोई भी काम पड़े,कमरा बंद करके पड़ी रहती थी। मम्मी कहती थी कि पहले बेटे का ब्याह…

  • “तुमने क्या डाला मेरी गाड़ी में?”(कहानी)

    “तुमने क्या डाला मेरी गाड़ी में?”(कहानी)

    “तुमने क्या डाला मेरी गाड़ी में?”(कहानी) अभी कुछ देर पहले जिस चमचमाती काली गाड़ी में रोहित ने फ्यूल भरा था वो कुछ दूर चलकर अचानक से रुक गई। थोड़ी देर रुकी रही फिर सामने गैरेज से एक मैकेनिक आया। फिर कुछ ही देर बाद उस गाड़ी का मालिक अपनी गाड़ी से उतरकर रोहित के करीब…

  • *वृंदावन के दिव्य नागा बाबा -कदमखण्डी(प्रसंग)

    श्री धाम वृंदावन में एक बाबा रहते थे जो भगवान श्री कृष्ण और श्री राधा रानी स्वरुप की उपासना किया करते थे। एक बार वे बाबा संध्या वंदन के उपरांत कुञ्जवन की राह पर जा रहे थे। मार्ग में बाबा जब एक वटवृक्ष के नीचे होकर निकले तो उनकी जटा उस वटवृक्ष की जटाओं में…

  • अब आया ऊँट पहाड़ के नीचे।” (कहानी)

    “पिता जी आप सारा दिन बिस्तर पर ही बैठे रहते हो। यहीं खाते पीते हो और सारा सारा दिन ‘टी वी’ देखते हो इसीलिए आप की हड्डियों ने जबाव दे दिया है थोड़ा चला फिरा करो घूमा करो गली में।” राजेश अपने पिता कोसमझा रहा था या झुंझला रहा था पिता दीनानाथ जी को कुछ…

  • “पिताजी हिम्मत मत हारिए।(कहानी)

    रवि ऑफिस से आते ही सीधे कमरे की तरफ़ चला गया. बैठक में बैठे पिता, जिनकी आंखें उसके आने के समय बाहर टिक जाती थीं, उसके आते ही निश्चिंत हो कमरे में चले जाते. ये उनका रोज़ का नियम है. आज ही नहीं उसके बचपन से.5…10…15 मिनट ऊपर होते ही उनकी बेचैनी शब्दों में निकलने…

  • कोई भी मौका हाथ से ना जा पाए (कहानी)

    कोई भी मौका हाथ से ना जा पाए (कहानी) एक बार की बात है, एक किसान था। जिसकी एक बहुत ही सुंदर कन्या थी। एक दिन एक नौजवान लड़का उस कन्या से शादी का प्रस्ताव लेकर किसान के पास पहुंचा। उस समय किसान खेत में काम कर रहा था। किसान ने लड़के की ओर देखा…

  • कुछ तो दिया (कहानी)

    बुद्ध एक दिन एक घर के बाहर भिक्षा मांगने पहुंचे। दरवाजा खटखटाते ही एक औरत ने दरवाजा खोला। लेकिन यह क्या। सुबह-सुबह यह भिक्षु कहां से आ गया? सो बस उसने भला-बुरा कहते हुए दरवाजा वापस बंद कर दिया। एक पड़ोसी दूर से यह तमाशा देख रहा था, वह बुद्ध विरोधी भी था। सो उसे…