कई बार लोग कहते हैं कि हम जिस नज़रिए से रियलिटी को देखते हैं. हमें सिचुएशन वैसी ही नज़र आने लगती है. लेकिन क्या हो अगर रियलिटी ही प्रॉब्लम हो. इसे हम इस उदाहरण से समझ सकते हैं. मान लीजिए कि आपका बॉस सच में अनसपोर्टिव हो, या फिर आपके ऑफिस का वर्क लोड सच में बहुत ज्यादा हो. या फिर ऑफिस में आपके प्रमोशन का रास्ता सच में ब्लॉक हो.

इन सभी केसेज में प्रॉब्लम रियलिटी की तरफ गलत नज़रिया नहीं है. बल्कि खुद रियलिटी ही एक बड़ी प्रॉब्लम है. इस तरह की सिचुएशन में भले ही आप अपने नज़रिए को कितना भी बदल लें? लेकिन उससे प्रॉब्लमस रत्ती भर भी कम नहीं होंगी.

क्या आपने कभी बैकपैक बैग अपनी पीठ में कैरी किया है? अगर किया है तो आपको पता होगा कि कभी-कभी तो वो आपको काफी हल्का महसूस होता होगा. लेकिन जब आप थके हुए होते होंगे, तब उसी बैग का वजन आपकी जान लेने वाला लगता होगा.

 

By REEMA SRIVASTAVA

I AM MUKESH KUMAR SRIVASTAVA

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