Life changing thoughts Moral of the Story जब हर जगह से नकार दिया जाता हूँ !”(कहानी)

जब हर जगह से नकार दिया जाता हूँ !”(कहानी)

“माँ बाप के साथ से बन जाये बात “”क्या हुआ आज भी नौकरी नही मिली ना ?” सविता बेटे नमन के घर मे घुसते ही बोली।” हाँ नही मिली तो क्या करूँ कोशिश कर रहा हूँ ना !” नमन झुंझला कर बोला।” माँ पर क्यो झुंझला रहा है ? जब कहा था मन लगा के पढ़ ले तब तो आवारा दोस्तों मे ध्यान था तेरा जबकि पता है ।

कॉम्पिटिशन का जमाना है अच्छे खासे नंबर वालों को नौकरी नही मिलती तू तो मुश्किल से पास हुआ है !” पिता राजन बोले।” हाँ अब आप भी सुना लीजिये जली कटी बातें सब बस मुझे सुनाओ मेरी दशा कोई मत समझो मुझपर क्या बीतती है जब हर जगह से नकार दिया जाता हूँ !” नमन लगभग रोते हुए बोला

और अपने कमरे की तरफ बढ़ गया। सविता और राजन ने एक दूसरे की तरफ देखा और नमन के कमरे की तरफ बढ़ चले।” किसने कहा फिर कि बार बार नकारे जाओ ?” राजन बोले।” मतलब !! अब ये तो उनकी मर्जी है ना मुझे नौकरी पर रखे या नही इसमे मैं क्या कर सकता हूँ ?” हताश नमन पिता की बात सुन बोला।

” बेटा भले तुम्हारे पास बड़ी डिग्री नही पर हौसला तो है ना । कुछ अपना काम करो पर यूँ निराश मत होओ समझे !” सविता बेटे के कंधे पर हाथ रखकर बोली।
” माँ अपने काम के लिए पैसे लगते है और आपके बेटे के पास ना डिग्री है ना पैसे जीरो है वो एक दम जीरो !” ये बोल नमन हाथो मे मुंह छिपा रो दिया।

” बेटे अगर तुम लगन से अपना काम करना चाहते हो तो पैसे की चिंता हम पर छोड़ दो हमारे लिए तुम्हारा लाखों कमाना नही आत्मविश्वास के साथ कमाना ज्यादा मायने रखता है समझे तुम । जो गलती हुई उसे भूल नई शुरुआत करो सोचो क्या करना है एक बजट तैयार करो सारी रुपरेखा बनाओ और जुट जाओ खुद को साबित करने मे हम तुम्हारे साथ है !

” राजन ने बेटे का कंधा थपथपा कर कहा।
” सच पापा !! मैं आपका भरोसा नही तोड़ूंगा कुछ करके दिखाऊंगा आपको !” नम किन्तु चमक भरी आँखें लिए नमन पिता के गले लग गया।।
” परन्तु तुम्हे हमसे एक वादा करना होगा …जिंदगी मे कभी निराश नही होगे ना कोई गलत मार्ग चुनोगे !” सविता बोली।

” कभी नही माँ जिसके माँ बाप उसके साथ हो वो गलत मार्ग कैसे चुन सकता है । मै समझ गया हूँ माँ बाप की बाते जली कटी नही होती वो तो औलाद को प्रेरित करती है कुछ कर गुजरने के लिए !” ये बोल नमन ने माँ को भी गले लगा लिया। सविता और राजन को संतोष था उन्होंने बेटे को निराशा के दलदल मे जा कुछ अनिष्ट करने से पहले संभाल लिया।

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