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अपने दिन की तनाव भरी शुरुआत से बचने के लिए काल्मिंग एक्टिविटी का इस्तेमाल करें।

सुबह अलार्म की अचानक आवाज़ सुनकर आपकी नींद एड्रेनालाईन के झटके के साथ खुल सकती है, जिससे आप अलर्ट से ज़्यादा टेंशन में आ जाते हैं। और काम, स्कूल या बच्चों की देखभाल से भरे लंबे दिन के साथ आपका शेड्यूल इस टेंशन की वजह से शायद और ज़्यादा तनाव से भरा हुआ हो जाए।  इसलिए गेटिंग कॉम्फी की शुरुआत सी, से होती है। सी फॉर काल्म।

जब बात उठने की हो, जो कॉमनेस यानि शांति ही असली तरीका है। हमसे अक्सर कहा  जाता है कि किसी भी बड़े इवेंट  – चाहे वो जॉब इंटरव्यू हो या पहली डेट,  के लिए तैयार होने का  सबसे अच्छा तरीका है रिलैक्स होना।  इसलिए अपने मॉर्निंग रूटीन का एक हिस्सा, शांत और कलेक्टेड महसूस करने की प्रैक्टिस करने के लिए डेडिकेट करना बहुत ज़रूरी है।

शांति पाने के कई बेहतर तरीकों में से एक है, मेडिटेशन। ग्रॉस ने देखा कि रोज़ाना अपने सुबह की शुरुआत पांच मिनट के शांत माइंडफुलनेस के साथ करने से, उनके पूरे दिन के नज़रिये पर एक बड़ा पॉजिटिव इम्पैक्ट पड़ता है।  आपको ये ट्राई करने के लिए एक्सपर्ट बनने की ज़रूरत नहीं।  सबसे पहले, बैठने की एक कम्फर्टेबल जगह ढूंढें।  अब, अपनी आंखें बंद करके अपनी ब्रीदिंग पर कंसन्ट्रेट करें, या किसी छोटे मंत्र का बार बार जाप करें।  आगे के इंस्ट्रक्शन के लिए आप किसी ऐप के ज़रिये गाइडेड मेडिटेशन के साथ भी एक्सपेरिमेंट कर सकते हैं।

उन जल्दी उठने वालों के लिए, जिन्हें दोबारा सोने से बचने के लिए थोड़ी और एक्टिविटी की ज़रूरत है, ग्रॉस कहते हैं कि उन्हें अपने मेडिटेशन रूटीन में योगा और स्ट्रेचिंग को भी शामिल कर लेना चाहिए। यहां तक कि अगर आप कोई कठिन आसान या पोज़ नहीं भी कर पाते हैं, तब भी ये आपकी बॉडी को थोड़ा लूज़ करते हुए दिमाग को शांत करने का बेहतरीन तरीका है। यहां तक कि अपनी पैर की उँगलियों को छूने और गर्दन को धीरे धीरे दोनों कन्धों की ओर झुकाने जैसी बेसिक स्ट्रेचिंग भी जादू जैसा काम करेगी।

आप क्या महसूस करते हैं, उसपर आपकी सराउंडिंग का काफी असर होता है। इसलिए अपने स्ट्रेचिंग और मेडिटेशन के लिए सबसे शांत जगह खोजने की कोशिश करें। वैसे तो सुबह उठने के लिए एक सुनसान बीच या घना जंगल आदर्श जगह है, लेकिन घर की बालकनी या पास का पार्क आपकी कॉम्फी रूटीन के लिए अच्छी जगह हो सकते हैं। यहां तक कि आप कोई इंस्ट्रुमेंटल म्यूजिक या पीसफुल वीडियो चलाकर घर के अंदर भी एक बढ़िया माहौल तैयार कर सकते हैं।

एक शांत सुबह के लिए कोई एक रास्ता नहीं है।  ज़रूरी ये है कि आपके लिए सबसे अच्छा क्या है, ये पता करने के लिए एक्सपेरिमेंट करते वक़्त, आपको नए नए तरीके आज़माते रहने होंगे। अगले लेसन से हमें पता चलेगा, कि कॉम्फी होने के लिए नई चीज़ों के लिए तैयार रहना भी बहुत ज़रूरी है।

हर सुबह एक मौका है अपनी, और अपनों की खोज खबर लेने का।

जब हम सो रहे होते हैं, तो सिर्फ हमारी आंखें ही बंद नहीं होतीं, बल्कि हम खुद से, हमारे रिश्तों से और हमारे आसपास की दुनिया से पूरी तरह कटऑफ रहते हैं। एक कम्पलीट मॉर्निंग रूटीन में इन सभी ज़रूरी कनेक्शंस को फिर से जोड़ने के लिए भी कुछ लम्हे होने चाहिए। इसी वजह से कॉम्फी का दूसरा लेटर O है, ओपननेस के लिए।

ज़िंदगी से ज़्यादा से ज़्यादा हासिल करने  के लिए दूसरों से खुलना बहुत ज़रूरी है। ग्रॉस ने ये बात सीखी जब एक बार वो अपने उबर ड्राइवर से बहस में उलझ गए। उनका उबर ड्राइवर रॉनी राइस निकला, शिकागो का म्यूजिक लीजेंड। अपनी राइड के दौरान ग्रॉस ने राइस से सैंकड़ों सवाल पूछे, जिनके जवाब में उन्हें हज़ारों कहानियां सुनने को मिलीं, जिनमें से कुछ इस बारे में भी थीं कि 70 के दशक में रॉक एंड रोल प्ले करने का अनुभव कैसा होता था।

किसी दूसरे इंसान में दिलचस्पी दिखाकर ग्रॉस ने ना सिर्फ अपना ज्ञान बढ़ाया, बल्कि एक अजनबी को खास महसूस करवाया और साथ ही इस प्रोसेस में एक नया कनेक्शन भी बनाया। अपने दिन की शुरुआत ओपननेस की इसी भावना के साथ करने से आपको ना सिर्फ अपने रिश्ते मेन्टेन करने में मदद मिलेगी, बल्कि इससे आपके आसपास पॉजिटिव इवेंट्स भी होने लगेंगे।

ओपननेस की प्रैक्टिस करना, पुराने दोस्त को हालचाल पूछने के लिए एक टेक्स्ट भेजने जितना आसान है, या अपने पोटेंशियल बिज़नेस पार्टनर को अप्रोच करना।  इसमें झिझकने वाली कोई बात नहीं है, बल्कि आप ऐसा करते वक़्त जेन्युइन, एंथुज़ियास्टिक और मेमोरेबल रहें। आप चाहे किसी से भी बात क्यों न करें, सब पर यही सिद्धांत काम करेंगे। उदाहरण  के लिए एक सुबह ग्रॉस ने अपने उन टीचर को थैंक्यू ईमेल भेजा जिन्होंने ग्रॉस को फेल किया था। टीचर ने जवाब में ग्रॉस की सराहना की जिससे उन्हें गर्मजोशी का एहसास हुआ और ये एहसास पूरे दिन उनके साथ बना रहा।

अपनी भावनाओं को ईमानदारी से एक्सप्रेस करना रिश्ते बनाने के लिए एक शानदार तरीका है। हालांकि, निजी विषयों पर हलकी-फुलकी बातें करने के लिए बहुत सारे इंट्रोस्पेक्शन की ज़रूरत है।  हर सुबह, दूसरों को कॉन्टैक्ट करने से पहले, कुछ पल खुद से खुलने में भी बिताएं। अपना फ़ोन और कंप्यूटर दूर रख दें और डायरी लिखने की कोशिश करें। लिखते वक़्त अपनी संवेदनाओं को ना छिपाएं। आप क्या करना चाहते हैं, क्या चीज़ें आपको अच्छी लगती हैं और किन चीज़ों से आपको डर लगता है, इन सभी बातों के बारे में लिखें।

लिखने की इस एक्सरसाइज से आपको अपनी ज़रूरतों और ख्वाहिशों को बेहतर तरीके से हैंडल करने में मदद मिलेगी। आप इस एक प्रैक्टिकल गेम में भी तब्दील कर सकते हैं। रोज़ सुबह अपने लिए एक टू-डू लिस्ट बनायें और उसमें लिखे हर टास्क को पूरा करने के लिए खुद को चैलेंज करें।

इस तरह वक़्त निकालकर और खुलने की कोशिश करके आप न सिर्फ खुद से बल्कि दूसरों से भी एक कीमती रिश्ता कायम कर पाएंगे।  लेकिन सिर्फ यही चीज़ें नहीं हैं जिन्हें अटेंशन की ज़रूरत है। चलिए पता करते हैं कि हर सुबह अपने शरीर का ख्याल रखना क्यों ज़रूरी है।

By REEMA SRIVASTAVA

I AM MUKESH KUMAR SRIVASTAVA

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