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बड़ी कामयाबी हासिल करने के लिए आपको बड़ा सोचना होगा।

आपने लोगों को कहते हुए सुना होगा कि – मीलों का सफर एक कदम से शुरू होता है। लेकिन ये कहावत गलत है। मीलों का सफर इस सोच से शुरू होता है कि हमें मीलों का सफर करना है। ठीक इसी तरह ताजमहल आगरा में बनने से पहले किसी के दिमाग में बना था।

सीधे शब्दों में कहा जाए तो अगर आपको बड़ा बनना है तो सबसे पहले आपको बड़ा सोचना होगा। अगर आप बड़ा सोच नहीं सकते तो आप कभी बड़ा नहीं बन पाएंगे।

हम में से ज्यादातर लोग बड़ा नहीं सोच पाते। अगर हम बड़ा सोचने की कोशिश करें तो कहीं ना कहीं हमारा दिमाग हमसे कहता है – हवा में मत उड़ो, एक दिन गिरोगे तो जमीन पर ही आओगे। इस तरह की सोच ही हमें तारों को छूने से रोक देती है।जब हम ऐसी सोच को अपने ऊपर हावी होने देते हैं तब हम पूरी तरह से नेगेटिविटि से भर जाते हैं जो हमारी क्षमता को कम करके हमें एक सीमा में कैद कर देती है।

अगर हम इतिहास में जा कर देखें तो हमें पता लगेगा कि कुछ लोगों ने अपने आप की सीमा कभी नहीं नापी। वे बस आगे बढ़ते गए और एक दिन उन्होंने वो कर दिखाया जिसे लोग असंभव का नाम दिया करते थे। एक्ज़ाम्पल के लिए आप उन दो भाइयों को ले लीजिए जिन्होंने 16 साल की मेहनत के बाद साइकल के पूर्जों से हवाई जहाज बना कर दिखाया था।

विज्ञान की दुनिया में आपको ऐसे ही अनगिनत लोग मिलेंगे जिन्होंने वो काम कर के दिखाया जो सुनने में आज भी असंभव लगता है। हमारी सीमा सिर्फ हमारी सोच पर निर्भर करती है। अगर आप बड़ा सोच सकते हैं तो आप बड़ा बन सकते हैं।

By Reema Srivastava

I AM REEMA SRIVASTAVA

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