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  • 1.साक्षात्कार, समूह चर्चा एवं जन सभा में बोलना

    2.अपने विषय पर बात करने की योग्यता केसे बढ़ाएं

    3.कपडे, अभिवादन, समाचार-पत्र आदि

    4.साक्षात्कार में पूछे जाने वाले कुछ सामान्य प्रश्न ये हैं-

    5.साक्षात्कार के लिए आत्म विश्वास कैसे विकसित करें

  • इसमें साक्षात्कार, समूह चर्चा एवं जन सभा में बोलने हँतु तैयारी के लिए कुछ तकनीकें सिखाई गई हैं।

  • 1.साक्षात्कार, समूह चर्चा एवं जन सभा में बोलना

  • प्रवेश, छात्रवृत्ति, नौकरियों आदि के लिए साक्षात्कार रखे जाते हैं। किसी साक्षात्कार में एक कमरे में एक या अधिक व्यक्ति बैठ कर प्रत्याक्षी से कुछ प्रश्न पूछते हैं अथवा चर्चा करते हैं।

  • समूह चर्चा या ग्रुप डिस्कशन नौकरियों के लिए आयोजित की जाती है। समूह चर्चा में अनेक विद्यार्थी एक ही स्थान पर बैठकर किसी विषय पर चर्चा करते हैं। इस समय परीक्षक उनके समीप एक कोने में बैठ कर उन्हें चर्चा करते हुए देखता-सुनता रहता है तथा यह निश्चित करता है कि कौन से विद्यार्थी में सफलता के गुण हैं।

  • जनसभा में बोलना, नौकरी, शोध प्रबन्ध, परियोजन कार्य, वाद-विवाद, किसी उत्सव या किसी पाठयक्रम के लिए हो सकता है। इसमें एक विद्यार्थी लोगों के बीच खड़ा होता है एवं अपने विषय के बारे में बोलता है। अंत में उस विद्यार्थी को लोगों के कुछ सवालों का जवाब भी देना हो सकता है।

  • इस अध्याय में आगे “साक्षात्कार” शब्द का अर्थ साक्षात्कार, समूह विचार विमर्श या जनसभा में बोलने सबसे लिया गया है।

  • 2.अपने विषय पर बात करने की योग्यता केसे बढ़ाएं

  • साक्षात्कार का एक महत्त्वपूर्ण तथ्य यह है कि परीक्षक का निर्णय बहुत व्यक्तिगत होता है। इसका अर्थ यह है कि अगर दस परीक्षकों द्वारा अंक दिए जा रहे हैं, तो उनके परिणाम समान नहीं होंगे। एक विद्यार्थी कुछ परीक्षकों की निगाह में सर्वोत्तम हो सकता है, जब कि दूसरे उसे औसत अथवा औसम के कम भी मान सकते हैं। यही व्यक्तिगत नजरिया साक्षात्कार के लिए तैयारी करने को और भी कठिन बना देता है।

  • आपके नियंत्रण में आने वाली दो बातों पर साक्षात्कार की सफलता निर्भर करती है

    (1) विषय के बारे में आपका ज्ञान

    (2) विषय के बारे में बात करनें और विचार विमर्श करने की आपकी योग्यता।

  • यहाँ पर मैं आपको सिर्फ आपके विषय पर बात करने की योग्यता को बढ़ाने के लिए एक तकनीक सिखाऊँंगा।

  • साक्षात्कार में परीक्षक के सामने बोलना अथवा समूह के सामने भाषण देना व चर्चा करना एक कला है। किसी भी प्रारम्भकर्ता के लिए यह आवश्यक नहीं है कि उसे मनोविज्ञान का विशिष्ट ज्ञान हो अथवा यह जानकारी हो कि समूह में लोगों का व्यवहार कैसा होता है। आपके लिए सिर्फ इतना ही आवश्यक है कि स्वंय में आत्मविश्वास रखें और जो कुछ भी आपके मस्तिष्क में उभर रहा है, उसे कहते चले जाएं।

  • किसी साइकल को चलाना सीखने के समान ही आप मात्र अभ्यास के द्वारा समूह में बोलना सीख सकते हैं। इसका और कोई दूसरा तरीका नहीं है।

  • अभ्यास करने का सरलतम तरीका यह है कि अपने मित्रों के साथ एक स्थान पर एकत्र हो जाएं। कल्पना करें कि वास्तव में साक्षात्कार हो रहा है। अगर आप किसी वास्तविक साक्षात्कार के लिए टाई बांध कर जाना चाहते हैं तो यहाँ भी टाई बांधें। अभ्यास की इस स्थिति को आप जितना वास्तविक रूप दे सकते हैं, उतना ज्यादा आपको लाभ होगा । वास्तव में आप अपने किसी टीचर से या मित्र से निवेदन कर सकते हैं कि वह आपका साक्षात्कार लेवें।

  • इस अभ्यास का एक मुख्य भाग यह है कि आप अभ्यास के पश्चात्‌ दो प्रश्न पूछें

    पहले पूछें, मैने क्या बहुत अच्छा किया? इससे आपमें आत्मविश्वास बढ़ेगा। दूसरा प्रश्न है“मैं कैसे सुधार कर सकता हूँ? या मैं अधिक अच्छा कैसे बन सकता हूँ?” पुनः उत्तरों को ध्यानपूर्वक सुनें | यह महत्त्वपूर्ण है। आपके गैर विशेषज्ञ मित्र भी आपको इतना तो बता ही सकते हैं कि आप आलसी व्यक्ति के समान सोफे पर बैठे थे, या आप सीधे अधिक तनकर बैठे थे। या आप कुर्सी के किनारे पर बैठे थे, या आप परीक्षक सदस्यों में से किसी एक के प्रश्नों का ही जवाब दे रहे थे, आदि।

  • लिखित सलाह का कोई अन्त नहीं है। आपको साक्षात्कार का अभ्यास करना ही पड़ेगा

    अगर आपको सिर्फ साक्षात्कार की ही तैयारी करनी है, तब भी नेश राझाव है कि आप तीनों तरह (साक्षात्कार, समूह विचार-विमर्श एवं जन सभा में बोलने) के लिए तैयारी करें और अभ्यास करें। इससे आपकी बोलने की योग्यता का तेजी से विकास होगा।

  • किसी भी साक्षात्कार का एक अन्य महत्त्वपूर्ण तथ्य यह है कि साक्षात्कार लेने वाले परीक्षक पहले आपसे बहुत सरल सवाल पूछेंगे-आपके, आपकी पढ़ाई, आपके स्थान आदि के बारे में। यह इसलिए किया जाता है कि आप आराम महसूस करें और इसके बाद आपसे विषय ज्ञान के बारे में पूछा जा सके |

  • लेकिन यह भी याद रखिएकुछ अयोग्य एवं दूसरों को दुखी करने वाले परीक्षक आपको आराम महसूस्र करने का मौका ही नहीं देंगे। उस स्थिति में भी इस पुस्तक में वर्णित विश्वास एवं तनाव-मुक्त रहने की तकनीकें आपको आराम और आत्मविश्वास बनाए रखने में सहायक होगी।

  • 3.कपडे, अभिवादन, समाचार-पत्र आदि

  • जब आप साक्षात्कार के लिए कमरे में प्रवेश करें, तब कुछ अपेक्षाकृत सरल बातों पर भी ध्यान देना आवश्यक है। जैसे – क्या पहना जाए? कमरे में प्रवेश के समय क्या कहा जाए? आदि ।

  • जो उचित और विवेकपूर्ण लगे, वही करें। कोई विशिष्ट नियम नहीं है। यहाँ कुछ निर्देश बिन्दु दिए जा रहें हैं। जब आप साक्षात्कार का अभ्यास करें,

    तब इस सूची का उपयोग करें।

  • » साफ-स्वच्छ दिखिए। साफ एवं स्वच्छ वस्त्र पहनें। जूतों पर पालिश करें।

    » समय पर पहुँचें। *

    » जब आप साक्षात्कार कक्ष में प्रवेश करें तब “नमस्कार श्रीमान” या गुडमॉर्निय सर आदि कहकर अभिवादन करें।

    *अगर आप हाथ मिलाने जा रहें हैं, तो सुदृढ़ (लेकिन ज्यादा जोर से नहीं) हाथ मिलाएं। कई व्यक्ति सुदृढ़ हाथ मिलाने को विश्वास का प्रतीक मानते हैं।

    « आपके बैठने के लिए किसी के कहने की प्रतिक्षा करें। जब बैठने को कहा जाए, तो धन्यवाद दें और फिर कुर्सी पर बैठें।

  • *बिना बीच में बोले साक्षात्कारकर्त्ता को सुनें। उत्तर देने के पहले उन्हें अपना प्रश्न पूरा कर लेनें दें।

  • «» यदि आप किसी विषय के बारे में नही जानते हैं, तो स्पष्ट बता दीजिए। झांसा देने या झूठ बोलने से कोई फायदा नहीं।

  • «» आप जब बोल रहें हों तब सब की तरफ देखिए | और जब सुन रहें हों, तब बोलने वाले की तरफ देखिए।

  • «बोलते समय ज्यादा जोर से अथवा बिल्कुल धीमी आवाज में नहीं बोलें।

  • « साक्षात्कार कक्ष छोड़ने के पहले साक्षात्कारकर्त्ता को धन्यवाद दें।

  • « आई. ए. एस. या इसी प्रकार के अन्य साक्षात्कारों के समय दैनिक समाचार पत्र भी पढ़िए, ताकि आप इस दिन के समाचारों से अवगत रहें | अन्य अधिकांश साक्षात्कारों के लिए दैनिक समाचार पत्र पढ़ना महत्त्वपूर्ण नहीं है।

  • 4.साक्षात्कार में पूछे जाने वाले कुछ सामान्य प्रश्न ये हैं-

  • * आप यह नौकरी क्‍यों चाहते हैं?

  • *« हमें अपनी पूर्व नौकरियों के बारे में बताइए।

  • * अपने आपके बारे में बताइए.।

  • « अपनी शिक्षा बारे में बताइए।

  • * आजकल की घटनाओं के बारे में प्रश्न।

  • * समस्याओं के निराकरण हेतु प्रश्न।

  • 5.साक्षात्कार के लिए आत्म विश्वास कैसे विकसित करें

  • बहुत से लोग साक्षात्कार के समय, समूह विचार विर्मश के समय एवं जन सभा में बोलते समय घबराहट महसूस करते हैं। यहाँ तक कि विश्व के प्रख्यात वक्ता भी कई बार घबराहट महसूस करते पाए गए हैं। अमरीका के विख्यात राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने इस तथ्य को अपनी पुस्तक में स्वीकार किया है। तनिक घबराहट महसूस करना ठीक है और सही है। कुछ घबराहट होने का अर्थ है कि अतिरिक्त ऊर्जा शरीर में पैदा हो रही है। आपको बोलना प्रारंभ करते समय उस अतिरिक्त शक्ति को उपयोग में लेना सीखना है। एक बार जब आप बोलना प्रारंभ कर देंगे, तो एक-दो मिनट तक बोल लेने के पश्चात्‌ आप घबराहट महसूस नहीं करेंगे और बातचीत करना तथा विचार-विमर्श करना आसान हो जाएगा।

By Reema Srivastava

I AM REEMA SRIVASTAVA

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