ये कहानी है,दो परिवारों की
(आपने उन्हे कैसे संस्कार दिए है)

जो एक ही शहर मे रहते है,लेकिन दोनो परिवारों का घर शहर के अलग अलग इलाके मे है।दोनो परिवारों मे मा,बाप,बेटा,बेटी ऐसे चार लोग रहते है।दोनो ही परिवार एक अच्छा जीवन बिता रहे होते है।दोनो ही परिवारों मे माँ और बाप अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा प्रदान कर रहे है।

पर इन दोनो परिवारों मे कई अंतर है।एक परिवार शहर के उस इलाके मे रहता है जहा अमीर लोगो का बसेरा है।तो वही दूसरा परिवार शहर के उस इलाके मे रहता है जहा गरीब लोग रहते है। इसका मतलब है एक परिवार गरीब है तो दूसरा अमीर।गरीब परिवार मे माँ पिता पढ़े लिखे नही है,अपने बच्चो पर भी ऐसी नौबत न आए ।

इसीलिए अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा प्रदान करने के लिए गरीब परिवार मे माँ और पिता दिनभर मजदूरी करते है और उस मजदूरी से मिले कुछ पैसो से घर का सारा खर्चा और बच्चों की पढ़ाई लिखाई का खर्चा करते है।अमीर परिवार मे सिर्फ पिता काम करते है।वो अच्छी तनख्वाह पर एक private bank मे नौकरी करते है।

दोनो परिवारों के बच्चे शिक्षा मे उम्दा प्रदर्शन करते है।बस दोनो मे अंतर यह है की घर मे mobile,laptop जैसी तरह तरह की सुविधाए उपलब्ध होने के कारण अमीर बच्चों को जहा पढ़ाई मे किसी भी सवाल का जवाब ढूंढने के लिए ज्यादा मशक्कत नही करनी पड़ती।तो वही गरीब परिवार के बच्चों को सवाल का जवाब ढूंढने के लिए किताबो को खंगालना पड़ता है।

अगर तब भी जवाब नही मिलता तो उन्हे अपने दिमाग़ पे जोर डालके जवाब खुद निकालना पड़ता है।अमीर परिवार मे पिता दिनभर bank मे काम करके घर आते है तब उनका माथा ठनका रहता है इसीलिए छुट्टी के दिन के अलावा परिवार के लोग एक दूसरे बाते करना टालते है और अपना अपना काम करके सो जाते है।काम के कारण हर किसी के के खाने का समय भी अलग अलग होता है।

गरीब परिवार मे एक छोटे से दिये के निचे परिवार के चारो लोग एक साथ बैठकर खाना खाते है।खाना खाते समय माँ बाप अपनी दिनचर्या बच्चों को बताते है और बच्चे अपनी पढ़ाई के बारे मे अपने माँ बाप को बताते है।बच्चों की कुशलता सुन माँ बाप मन ही मन खुशी के मारे रोते है तो वही बच्चे माँ बाप के कष्ट की गाथा सुन मन मे फुट फुट कर रोते है ।

और motivate हो कर खुद से वादा करते है की वो अपने माँ बाप की मेहनत को कभी जाया नही होने देंगे। सालो बीतने के बाद दोनो ही परिवारों के बेटे को अपनी अपनी काबिलियत की बदौलत अच्छी नोकरी लग जाती है। जो गरीब था वो अब एक खुशहाल ज़िंदगी बिता रहा है।उन्होंने कभी सपने भी सोचा नही था उनके पास ऐसा घर है,गाडी है और सब सुविधाए उपलब्ध है।

गरीब परिवार अमीर तो बन गया लेकिन जिस तरह का जीवन वो पहले बिताते थे,आज भी वैसा ही जीवन बिता रहे है। जैसे साथ बैठकर खाना खाना और अपने अपने दिनचर्या के बारे मे बताना।अब बस अंतर यह है की दिनचर्या की बातो से परिवार के लोग मन ही मन रोते नही बल्कि खुश होते है।

दूसरी ओर अमीर परिवार मे बेटे को नौकरी लगने के अलावा कुछ बदलाव नहीं हुआ है।उल्टा घर का माहौल पहले से बत्तर हो गया है।बेटा माँ बाप से ना तो ठीक से बात करता है और नहीं बात करना महत्वपूर्ण समझता है।बेटे को नौकरी लगने के बाद अमीर परिवार मे माँ बाप की दुख की घड़िया शुरु हो चुकी है।वो रोज हर घड़ी मर मर के जीवन व्यथित कर रहे है।

दोस्तों इससे हमे क्या सबक मिलता है?सबक यह मिलता है की कोई भी चिज जितनी आसानी से मिलती है उसकी कीमत कम हो जाती है।लेकिन मेहनत से कमाई गई चीज की कीमत दुनिया के महंगे से महंगे हीरे से भी ज्यादा होती है।
आपके बेटा या बेटी आपके साथ कैसा व्यवहार करते है,यह इस पर निर्भर नही करता की आपने उनके लिए कितनी सुविधाए दी है।

बल्कि यह इसपर निर्भर करता है की आपने उन्हे कैसे संस्कार दिए है।
जीवन अगर सुखी बनाना है तो मेहनत और संस्कार को अपने जीवन मे सबसे ज्यादा महत्व दो।


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